Friday, 6 October 2017

           Subah


हर सुबह एक तोहफा बनके आती है,
ओर हर शहर इसका स्वागत अपने तरीके से करता है!
कोई मॉर्निंग वॉक करता है,
तो कोई पलंग पे करवट लेकर ही कसरत का कोटा पूरा करता है!
कहीं कोई पूजा कर रहा है,
तो कहीं मौलवी जो अपनी शिद्दत का ऐलान कर रहे हैं!

जो उठा है, उसके चेहरे पर एक चमक रहती है,
उसे कुछ करना है लाइफ में!
हर सुबह एक देन है,  
उसे व्यर्थ जाने नहो दिया जा सकता।
जो सोता रह गया, उसने यह भेंट ठुकरा दी।
वह ज़्यादातर असंतुष्ट ही उठते हैं,
कही न कही उनका शऱीर भी उन्हें संकेत दे रहा है ,
कि खो दिया है तुमने कुछ!

सबको एहसास है,
सुबह है, कुछ कर लो,
पढ़ लो, बन लो!
सुबह आती है,
ताज़गी का एहसास लाती है,
पिछले रात की थकान मिटाती है!
और एक मौका लाती है,
पुरानी बातें भुलाके,
एक नई शुरुआत की जाए!

Thursday, 5 October 2017

Loss

This is dedicated to Ariel, the pet I lost this week; who had my heart and all in it

कोई अपना जब चला जाता है तो,
छोटी छोटी बातें सूई जैसे चुभती है,
कई आदतें जुडो होती है उनसे,
जिनका अब कोई तुख नहीं दिखता।

दरवाज़ा बंद करें किसके लिए,
किसके लिए दूध लाया जाए,
क्या करेंगे टाइम पे घर आके?
क्या करेंगे हरी सब्जी लाके?

उसका जो घर का कोना है,
वहाँ कोई नही है,
यही खुद को समझाने में कई दिन लग जाते है!

और दिल में उसकी जो जगह है,
उसे भरने में तो उम्र लग जाएगी!

Sunday, 13 August 2017

Dalits and Glory


This small write up or poem is in response to the recent deaths of people involved in sewer cleaning in Delhi. They mostly belong to the Valmiki community, and have been doing this inhumane job for thousands of years. Being a member of the privileged niddle class, I have no idea or maybe even right to talk about their lives, but I'm taking that liberty.


हमें दलित होने पे गर्व है,
अपने पर्वजों पे गर्व है,
उन्होंने जो कष्ट झेले,
उन्हें याद करके, हमारा यह कर्त्तव्य है,
कि कोई ऐसा कष्ट न सहे!


लड़ना अब हमारा धर्म है,
पढ़ना अब हमारा धर्म है,
आगे बढ़ना हमारा धर्म है,
तो लड़ो, बढ़ो और पढ़ो!

सफाई सभी की ज़िम्मेदारी है,
पर दलित ही क्यों इसमें जारी है?
नाली साफ़ करना हमारी मजबूरी थी,
पर क्या यह आने वाली पीड़ी के लिए भी ज़रूरी है?


वाल्मीकि, जोतिबा फ़ूले जी को याद करो,
झाड़ू छोड़ो, उठाओ किताब!
पाओ कामयाबी के सारे ख़िताब!
और चल पदों बाबासाहेब के रस्ते पर,
जय भीम!

Tuesday, 8 August 2017

टमाटर 

टमाटर 100 रूपए किलो का हो गया हैं,
कोई तो कुछ करो,
सरकार को सूचित करो!

कोहराम मचाओ,
धरना दो!

पर कही कोई हल्ला नहीं है,
या सब यहाँ अमीर हो गए है??
गरीब रोटी से सूखी सब्ज़ी खा रहा है,और करे भी क्या??
ईंटों को पीसके ग्रेवी बना ले क्या??
वहां उगाने वाला रो रहा है,
यहाँ खाने वाला भी रो रहा है,
बस बीच का दलाल खुश हो रहा है!

क्या यही विकास है ?
या इसमें भी सरकार की कोई नीति है,
सूखी रोटी खाओ, खुद को मोटापे से बचाओ!!

Monday, 7 August 2017

  सवारी 

हम रोज़ की सवारी हैं,
कभी काम से, कभी ऐंवई..... 

हम कहीं न कहीं आते जाते रहते है,
रस्ते पे आधी उम्र गुज़ारते है!
दुनिया भर का धुआं अंदर लेते है, 
और चू भी नहीं करते..... 

किसी सरकार को हमारा ध्यान नहीं,
इनके हिसाब से भेड़ बकरी है हम!
पर हमारे घूमने को फ़ुज़ूल नहीं बोलिये,
हम रोज़गार बढ़ाते हैं!

ओला, ऑटो, रिक्शा, बस, मेट्रो, सब हुमी पर ज़िंदा है,
हमसे तो ऑटो या रिक्शा वाले कुछ नहीं पूछते 
बस चल देते है। 
यही इज़्ज़त है हमारी,

क्योंकि हम है रोज़ की सवारी!

WhatsApp Ishq



ये क्या हो गया है मेरे शहर को?
ये क्या हो गया है इश्क़ को?
अब हाथों में हाथ लिए,
बाहों में बाहें डाले,
दूसरों को जलाने वाले,
शहर में प्यार की खुशबु फ़ैलाने वाले, 
गुम से हो गए हैं. 

यहाँ इश्क़ का जरिया अब फ़ोन है,
सबका ध्यान इसपे है,
सबकी साँसे टिकी हैं नीले टिक पर!!

यहाँ कोई फ़ोन को देखके मुस्कुरा रहा है,
कोई मायूस है,
कि अब तक जवाब क्यों नहीं आया???
कोई दो तीन पे चांस मार रहा है,
तो कोई एक ही पे दिल हार रहा है,
उसकी सच्ची आशिकी को मेरा सलाम!

कोई मोहतरमा यहाँ भाव खा रही है,
तड़पा रही है,
ढील देती जा रही है,
अरे! थोड़ा रहम करो, ओ ज़ालिमा!
आशिक़ों की यहाँ जान जा रही है!

बड़ा दिल 


मैं रस्ते पर चल रहा था।,
तेज़ी से, फुर्ती से ,
ऐसे की कहीं जल्द पहँचना है।
मंज़िल मेरे करीब आ गयी थी,
तभी मैंने देखा एक बूढ़े आदमी को,
अधनंगा, गरीब, लाचार,
मैंने झट से नज़र फेर ली ,
और आगे चलता रहा।
मन में सोचा,
काश मेरे पास बड़ा घर होता,
पैसा होता,
तो मैं सारे गरीबो को,
बेसहाराओं को
आश्रय देता ,
आवास देता,
दुनिया में किसी को भी ऐसी  स्तिथि  में आने नहीं देता।
फिर मुझे याद आया की अब भी मैं उसकी मदद  कर सकता था ,
अगर आर्थिक नहीं तो सहानुभूति दे सकता था,
किसी और से भी मदद मांग सकता था,
फिर मुझे समझ आया कि ...
काश, मुझे खुदा ने बड़ा दिल दिया होता !

Sunday, 9 July 2017

पसीना कभी अपना पसीना चखके तो देखो, कभी परिस्तिथियों से लड़के तो देखो ? कभी किस्मत की मार खाओ, इश्क़ में सब कुछ गवाओ, कभी आंसुओं में डूबके तो देखो! ज़िन्दगी, एक संघर्ष हो, कभी जंग से गुज़ारके तो देखो! लहू को बहाके, दिल को तुड़ाके, बाहें फैराके , मन को मारके, नशे में डूबके, कभी खुद को आज़माके तो देखो!

Saturday, 1 July 2017

             Redemption


It is the trees we plant that will redeem us.
It is the seeds we sow that will redeem us..
It is the souls we save that will redeem us...
And it is the lives we change that will redeem us. 
Redemption, my friend is important...

For it is our good deeds that will redeem us.

           Subah हर सुबह एक तोहफा बनके आती है, ओर हर शहर इसका स्वागत अपने तरीके से करता है! कोई मॉर्निंग वॉक करता है, तो कोई पल...