Thursday, 5 October 2017

Loss

This is dedicated to Ariel, the pet I lost this week; who had my heart and all in it

कोई अपना जब चला जाता है तो,
छोटी छोटी बातें सूई जैसे चुभती है,
कई आदतें जुडो होती है उनसे,
जिनका अब कोई तुख नहीं दिखता।

दरवाज़ा बंद करें किसके लिए,
किसके लिए दूध लाया जाए,
क्या करेंगे टाइम पे घर आके?
क्या करेंगे हरी सब्जी लाके?

उसका जो घर का कोना है,
वहाँ कोई नही है,
यही खुद को समझाने में कई दिन लग जाते है!

और दिल में उसकी जो जगह है,
उसे भरने में तो उम्र लग जाएगी!

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