Friday, 6 October 2017

           Subah


हर सुबह एक तोहफा बनके आती है,
ओर हर शहर इसका स्वागत अपने तरीके से करता है!
कोई मॉर्निंग वॉक करता है,
तो कोई पलंग पे करवट लेकर ही कसरत का कोटा पूरा करता है!
कहीं कोई पूजा कर रहा है,
तो कहीं मौलवी जो अपनी शिद्दत का ऐलान कर रहे हैं!

जो उठा है, उसके चेहरे पर एक चमक रहती है,
उसे कुछ करना है लाइफ में!
हर सुबह एक देन है,  
उसे व्यर्थ जाने नहो दिया जा सकता।
जो सोता रह गया, उसने यह भेंट ठुकरा दी।
वह ज़्यादातर असंतुष्ट ही उठते हैं,
कही न कही उनका शऱीर भी उन्हें संकेत दे रहा है ,
कि खो दिया है तुमने कुछ!

सबको एहसास है,
सुबह है, कुछ कर लो,
पढ़ लो, बन लो!
सुबह आती है,
ताज़गी का एहसास लाती है,
पिछले रात की थकान मिटाती है!
और एक मौका लाती है,
पुरानी बातें भुलाके,
एक नई शुरुआत की जाए!

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