Dalits and Glory
This small write up or poem is in response to the recent deaths of people involved in sewer cleaning in Delhi. They mostly belong to the Valmiki community, and have been doing this inhumane job for thousands of years. Being a member of the privileged niddle class, I have no idea or maybe even right to talk about their lives, but I'm taking that liberty.
हमें दलित होने पे गर्व है,
अपने पर्वजों पे गर्व है,
उन्होंने जो कष्ट झेले,
उन्हें याद करके, हमारा यह कर्त्तव्य है,
कि कोई ऐसा कष्ट न सहे!
लड़ना अब हमारा धर्म है,
पढ़ना अब हमारा धर्म है,
आगे बढ़ना हमारा धर्म है,
तो लड़ो, बढ़ो और पढ़ो!
सफाई सभी की ज़िम्मेदारी है,
पर दलित ही क्यों इसमें जारी है?
नाली साफ़ करना हमारी मजबूरी थी,
पर क्या यह आने वाली पीड़ी के लिए भी ज़रूरी है?
वाल्मीकि, जोतिबा फ़ूले जी को याद करो,
झाड़ू छोड़ो, उठाओ किताब!
पाओ कामयाबी के सारे ख़िताब!
और चल पदों बाबासाहेब के रस्ते पर,
जय भीम!
अपने पर्वजों पे गर्व है,
उन्होंने जो कष्ट झेले,
उन्हें याद करके, हमारा यह कर्त्तव्य है,
कि कोई ऐसा कष्ट न सहे!
लड़ना अब हमारा धर्म है,
पढ़ना अब हमारा धर्म है,
आगे बढ़ना हमारा धर्म है,
तो लड़ो, बढ़ो और पढ़ो!
सफाई सभी की ज़िम्मेदारी है,
पर दलित ही क्यों इसमें जारी है?
नाली साफ़ करना हमारी मजबूरी थी,
पर क्या यह आने वाली पीड़ी के लिए भी ज़रूरी है?
वाल्मीकि, जोतिबा फ़ूले जी को याद करो,
झाड़ू छोड़ो, उठाओ किताब!
पाओ कामयाबी के सारे ख़िताब!
और चल पदों बाबासाहेब के रस्ते पर,
जय भीम!