बड़ा दिल
मैं रस्ते पर चल रहा था।,
तेज़ी से, फुर्ती से ,
ऐसे की कहीं जल्द पहँचना है।
मंज़िल मेरे करीब आ गयी थी,
तभी मैंने देखा एक बूढ़े आदमी को,
अधनंगा, गरीब, लाचार,
मैंने झट से नज़र फेर ली ,
और आगे चलता रहा।
मन में सोचा,
काश मेरे पास बड़ा घर होता,
पैसा होता,
तो मैं सारे गरीबो को,
बेसहाराओं को
आश्रय देता ,
आवास देता,
दुनिया में किसी को भी ऐसी स्तिथि में आने नहीं देता।
फिर मुझे याद आया की अब भी मैं उसकी मदद कर सकता था ,
अगर आर्थिक नहीं तो सहानुभूति दे सकता था,
किसी और से भी मदद मांग सकता था,
फिर मुझे समझ आया कि ...
काश, मुझे खुदा ने बड़ा दिल दिया होता !
No comments:
Post a Comment