Monday, 7 August 2017

WhatsApp Ishq



ये क्या हो गया है मेरे शहर को?
ये क्या हो गया है इश्क़ को?
अब हाथों में हाथ लिए,
बाहों में बाहें डाले,
दूसरों को जलाने वाले,
शहर में प्यार की खुशबु फ़ैलाने वाले, 
गुम से हो गए हैं. 

यहाँ इश्क़ का जरिया अब फ़ोन है,
सबका ध्यान इसपे है,
सबकी साँसे टिकी हैं नीले टिक पर!!

यहाँ कोई फ़ोन को देखके मुस्कुरा रहा है,
कोई मायूस है,
कि अब तक जवाब क्यों नहीं आया???
कोई दो तीन पे चांस मार रहा है,
तो कोई एक ही पे दिल हार रहा है,
उसकी सच्ची आशिकी को मेरा सलाम!

कोई मोहतरमा यहाँ भाव खा रही है,
तड़पा रही है,
ढील देती जा रही है,
अरे! थोड़ा रहम करो, ओ ज़ालिमा!
आशिक़ों की यहाँ जान जा रही है!

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